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दतिया से दिल्ली तक सियासी भूचाल! आख़िर क्यों कट गया डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट? क्या बीजेपी में बदल गया ताकत का पूरा समीकरण, या शुरू हो गया नए दौर का राजनीतिक अध्याय?

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक समय ऐसा था जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सत्ता, संगठन और रणनीति—तीनों का पर्याय माना जाता था। भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती थी। सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी हो या विपक्ष पर राजनीतिक हमले, संगठनात्मक रणनीति हो या चुनावी प्रबंधन—डॉ. मिश्रा हर मोर्चे पर पार्टी के भरोसेमंद चेहरों में शामिल रहे।

लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें भाजपा की जॉइनिंग कमेटी की कमान सौंपी गई और उन्होंने कांग्रेस सहित कई दलों के नेताओं को भाजपा में शामिल कराकर अपनी संगठनात्मक क्षमता का परिचय भी दिया।

ऐसे नेता का दतिया उपचुनाव में टिकट न मिलना केवल एक सामान्य चुनावी फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि यह भाजपा की बदलती राजनीतिक दिशा का बड़ा संकेत भी माना जा रहा है राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया से मिली हार मानी जा रही है। भाजपा आमतौर पर लगातार हार के बाद स्था

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