दतिया का दांव: क्या भाजपा ने अपना सबसे बड़ा राजनीतिक जोखिम उठाया है?
दतिया का उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह मध्य प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा शक्ति परीक्षण बन चुका है। पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट बदलने के भाजपा के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह केवल चुनावी रणनीति है, पीढ़ी परिवर्तन का संकेत है, स्थानीय समीकरणों को साधने की कोशिश है, या फिर भाजपा एक नए राजनीतिक प्रयोग के रास्ते पर चल पड़ी है?
इन सवालों के जवाब अभी आधिकारिक रूप से किसी के पास नहीं हैं, लेकिन दतिया की सड़कों पर हो रहे विरोध, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और समर्थकों के प्रदर्शन यह जरूर बता रहे हैं कि यह फैसला सामान्य नहीं माना जा रहा। दूसरी ओर भाजपा नेतृत्व का विश्वास है कि हर निर्णय जीत के व्यापक गणित को ध्यान में रखकर लिया जाता है और पार्टी व्यक्ति से बड़ी होती है। यही कारण है कि एक तरफ विरोध की आवाजें सुनाई दे रही हैं तो दूसरी तरफ ऐसे कार्यकर्ता भी हैं जो पार्टी के फैसले के













