शराब दुकान मैनेजर पर फायरिंग कांड में पुलिस का एक और बड़ा एक्शन, अवैध कट्टे और जिंदा कारतूस के साथ करू पंडित गिरफ्तार
गोला का मंदिर थाना पुलिस की सटीक कार्रवाई, फरार आरोपी दबोचा गया, घटना में इस्तेमाल 315 बोर का कट्टा बरामद, फरार साथियों की तलाश तेज। ग्वालियर। गोला का मंदिर थाना क्षेत्र में शराब दुकान के मैनेजर पर फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले आरोपियों के खिलाफ पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है। इसी कड़ी में थाना […]
दतिया से दिल्ली तक सियासी भूचाल! आख़िर क्यों कट गया डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट? क्या बीजेपी में बदल गया ताकत का पूरा समीकरण, या शुरू हो गया नए दौर का राजनीतिक अध्याय?

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक समय ऐसा था जब डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सत्ता, संगठन और रणनीति—तीनों का पर्याय माना जाता था। भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती थी। सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी हो या विपक्ष पर राजनीतिक हमले, संगठनात्मक रणनीति हो या चुनावी प्रबंधन—डॉ. मिश्रा हर मोर्चे […]
नाकारा भ्रष्ट सिस्टम की भेंट चढ़ गए पंद्रह घरों के चिरागलेखक – मनोज कुमार अग्रवाल

राजधानी लखनऊ में पंद्रह असीम संभावनाओं से भरे बच्चों की एक अग्निकांड में जान चली गई। लखनऊ के अलीगंज में एक तीन मंजिला इमारत में जहां पालतू पशु दुकान, एनीमेशन और गेमिंग कोचिंग चलती थी जिसमें करीब 25-30 किशोरवय छात्र छात्राएँ पढ़ते थे जिन्होंने अपने भविष्य को गढ़ने के उद्देश्य से स्किल बढ़ाने के लिए […]
भारी पड़ेगा मानसून का रूठना

आदित्य सिन्हा। मानसून की महत्ता को इसी बात से समझ सकते हैं कि कहावतों में इसे ‘भारत का वास्तविक वित्त मंत्री’ कहा गया है। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मानसून की मेहरबानी बहुत मायने रखती है। चूंकि मानसून एक मौसमी परिघटना है, इसलिए उसकी दशा-दिशा भी कई जलवायविक पहलुओं पर निर्भर करती है। ऐसा ही एक पहलू […]
भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के अग्रदूत : राजाराम मोहन राॅॅय

राजा राममोहन राय को हम भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत और समाज सुधारक के रूप में जानते हैं. सती प्रथा व बाल विवाह समेत पारंपरिक हिंदू धर्म और संस्कृति की अनेक रूढ़ियों के उन्मूलन, महिलाओं के उत्थान और पारिवारिक संपत्ति व विरासत में अधिकार के लिए उन्होंने संभव प्रयत्न किये. उनकी बाबत रवींद्रनाथ टैगोर ने लिखा […]
1967: बदलाव की बयार, कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती

सन 1967 में हुए चौथे आम चुनाव से भारतीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई. 1962 से 1967 के बीच जो कुछ हुआ उसकी गूंज लम्बे समय तक देश की राजनीति मे सुनी जाती रही. देश की राजनीतिक फिजा में यह सवाल यद्यपि काफी पहले से तैरने लगा था कि नेहरू के बाद […]