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मतलब के लिए इस्तेमाल किया… फिर छोड़ दिया

मतलब के लिए इस्तेमाल कर लिया, अब छोड़ दिया… खैर, कोई बात नहीं। वक्त है, कभी भी बदल जाता है। जिन लोगों के लिए हमने अपनी जरूरतें पीछे रखीं, उनकी जरूरत बनकर खड़े रहे, आज वही लोग हमें अपनी जिंदगी से ऐसे निकाल रहे हैं जैसे हमारा कोई वजूद ही नहीं था। शिकायत नहीं है, बस अफसोस इतना है कि हमने रिश्ते दिल से निभाए और सामने वाले ने उन्हें जरूरत के हिसाब से तौला। वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। आज शायद तुम्हें हमारी जरूरत नहीं, लेकिन कल यही वक्त तुम्हें जरूर बताएगा कि जिसे तुमने मामूली समझकर छोड़ दिया था, वह तुम्हारे लिए कितना खास था।

आज जो खास हैं, कल मतलब निकलते ही बेगाने हो जाएंगे

जो लोग आज तुम्हारे खास बने फिर रहे हैं, उन्हें देखकर खुश मत होना। वक्त बदलते देर नहीं लगती। आज उनका काम तुमसे निकल रहा है, इसलिए तुम्हारे आसपास भीड़ है; कल मतलब खत्म हुआ तो वही लोग तुम्हारे घर तक आने से कतराएंगे। हमने भी कभी कुछ चेहरों को बहुत करीब देखा था, उनकी बातों पर भरोसा किया था और उनके लिए अपनी दुनिया तक बदल दी थी। लेकिन जब जरूरत खत्म हुई तो रिश्तों की असलियत सामने आ गई। इसलिए आज किसी की मौजूदगी पर घमंड मत करना। वक्त बड़ा बेरहम है, वह हर रिश्ते का सच सामने लाकर रख देता है।

लोग बदलेंगे, यह देखा था… तुम बदलोगे, यह उम्मीद नहीं थी

वक्त के साथ लोगों को बदलते देखा था, मगर तुम बदल जाओगे, यह उम्मीद कभी नहीं थी। तुम्हें बाकी लोगों से अलग समझा था, इसलिए तुम्हारे बदलने का दर्द भी बाकी सब से ज्यादा हुआ। हमने तुम्हारे शब्दों पर भरोसा किया, तुम्हारी खामोशियों को भी समझने की कोशिश की और तुम्हारे लिए कई बार खुद को गलत साबित होने दिया। बदले में बस इतना मिला कि एक दिन तुम भी उन्हीं लोगों की कतार में खड़े दिखाई दिए, जिनसे बचाकर तुम्हें रखा था। शायद गलती हमारी ही थी, हमने तुम्हें इंसान नहीं, अपना समझ लिया था।

मतलब निकाला और छोड़ दिया… हम फिर भी खामोश रहे

किसी का मतलब निकल जाने के बाद उसे छोड़ देना आसान होता है, लेकिन उस इंसान के लिए बहुत मुश्किल होता है जिसने रिश्ता मतलब से नहीं, मोहब्बत से निभाया हो। हमने तुम्हें कभी अपने फायदे के लिए नहीं चाहा था। तुम्हारे अच्छे वक्त में भी साथ थे और बुरे वक्त में भी। लेकिन जब तुम्हारा मतलब पूरा हुआ, तो तुम्हारे व्यवहार ने बता दिया कि हमारी कीमत सिर्फ उतनी थी, जितनी तुम्हारे काम आती थी। दर्द हुआ, बहुत हुआ… मगर शिकायत नहीं की। क्योंकि अब समझ आ गया है कि हर किसी को रोककर नहीं रखा जाता। कुछ लोग आते ही इसलिए हैं, ताकि हमें रिश्तों की असलियत सिखा सकें।

जहां हमने तुम्हें अच्छा दिखाया, तुमने वहीं हमें कहीं का नहीं छोड़ा

हमने तुम्हें जहां अच्छा दिखाया था, तुमने तो हमें वहीं कहीं का नहीं छोड़ा। जिन लोगों के सामने तुम्हारी इज्जत बचाई, तुम्हारी कमियां छिपाईं और तुम्हारी अच्छाइयों का जिक्र किया, उन्हीं के सामने आज हमें तुम्हारे कारण सफाई देनी पड़ रही है। हमने तुम्हारे सम्मान को अपना सम्मान समझा था, लेकिन तुमने हमारे भरोसे को हमारी कमजोरी समझ लिया। सबसे ज्यादा दर्द इस बात का नहीं कि तुम बदल गए, दर्द तो इस बात का है कि तुम्हें अच्छा दिखाने के लिए हमने खुद को कई बार गलत साबित होने दिया। काश उस वक्त समझ पाते कि हर किसी के लिए अच्छा बनना, जरूरी नहीं कि वह भी हमारे लिए अच्छा बने।

चलो अच्छा है… कोई तो हमारी कमी पूरी कर रहा है

चलो अच्छा है, कोई तो हमारी कमी पूरी कर रहा है। कभी जिस जगह पर हमारी मौजूदगी जरूरी हुआ करती थी, आज वहां किसी और ने अपनी जगह बना ली है। हमें खुशी है कि तुम्हें कोई ऐसा मिल गया जो शायद तुम्हारी उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। बस एक बात याद रखना—किसी की जगह भरना और किसी की कमी पूरी करना, दोनों अलग बातें हैं। हमने तुम्हारे साथ जो रिश्ता निभाया था, वह किसी जरूरत का हिस्सा नहीं था। वह दिल से था। इसलिए आज तुम्हारे साथ कोई और है तो हमें कोई शिकायत नहीं। बस इतना जरूर है कि कभी अकेले बैठकर सोचना, हमने तुम्हारे लिए क्या-क्या छोड़ा था।

वक्त के साथ बदलते लोग… और पीछे छूटती यादें

वक्त के साथ लोग बदलते हैं, रिश्ते बदलते हैं और कभी-कभी वही इंसान अजनबी बन जाता है जिसके बिना एक वक्त जिंदगी अधूरी लगती थी। हमने भी लोगों को बदलते देखा है, लेकिन हर बदलाव अपने साथ एक दर्द छोड़ जाता है। शुरुआत में लगता है कि शायद गलती हमारी है, फिर धीरे-धीरे समझ आता है कि कुछ रिश्ते सिर्फ एक तरफ से निभाए जा रहे थे। हमने तुम्हारे बदलने को स्वीकार कर लिया, लेकिन उन यादों का क्या करें जो आज भी वहीं खड़ी हैं? तुम आगे बढ़ गए, शायद हमें भी बढ़ना होगा। मगर दिल को समझाने में वक्त लगेगा कि अपना समझा इंसान भी कभी अपना नहीं था।

एक दिन समझ आएगा… कौन गलत था और कौन अपना

कभी तो तुम्हें समझ आएगा कि कौन गलत था और कौन तुम्हारा अपना। आज शायद तुम्हें मेरी बातें गलत लगती हैं, मेरी मौजूदगी बोझ लगती है और मेरी जगह किसी और ने ले ली है। लेकिन वक्त जब तुम्हें अकेले में बैठाकर पुराने रिश्तों का हिसाब देगा, तब शायद तुम्हें याद आएगा कि कौन बिना किसी स्वार्थ के तुम्हारे साथ खड़ा था। हमने तुम्हारे लिए उन लोगों तक को छोड़ दिया जिनसे हमारी कोई दुश्मनी नहीं थी। सिर्फ इसलिए क्योंकि हमें लगा था कि तुम्हें हमारा साथ चाहिए। हमें क्या पता था कि अंत में तुम ही हमें छोड़ दोगे। उस दिन शायद पछतावा होगा, मगर तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

हमने तुम्हारे लिए सब छोड़ा… तुमने आखिर में हमें ही छोड़ दिया

हमने तुम्हारे लिए उन लोगों तक को छोड़ दिया जिनसे हमारी कोई दुश्मनी नहीं थी। तुम्हारी खुशी के लिए रिश्ते बदले, तुम्हारी इज्जत के लिए चुप रहे और तुम्हारे साथ के लिए कई लोगों से दूरी बना ली। हमें लगा था कि हमारा यह त्याग कभी तुम्हें समझ आएगा। लेकिन हमें क्या पता था कि जिस इंसान के लिए हम सबको छोड़ रहे हैं, आखिर में वही इंसान हमें छोड़ देगा। आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता है कि हमने किसी और को खोने से ज्यादा खुद को खो दिया था। फिर भी कोई शिकायत नहीं… बस इतना जरूर है कि अब किसी के लिए खुद को इतना मत बदलना कि अंत में अपना ही वजूद खो बैठो

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