गा-बजाकर 12 साल पहले शुरु की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) की पर्तें अब खुलकर सामने आ गई हैं. इस का उद्देश्य देश के हर व्यक्ति को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था, लेकिन इससे जुड़ा एक नया आंकड़ा चौंकाने वाला है। एक आरटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में करीब हर चौथा जन धन खाता इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय है। इतना ही नहीं, 5.72 करोड़ जन धन खातों में कोई बैलेंस नहीं है।
मतलब देश की जीडीपी बढी है, प्रधानमंत्री जनता को बधाई दे रहे हैं लेकिन लोगों के पास फूटी कौडी नहीं जो वे जनधन खातों में जमा कर सकें. मंहगाई डायन खाए जात है. लेकिन माने कौन? इस योजना से बैंकों में काम बाढ आई. भीड बढी लेकिन सब बेकार. खाते खुले लेकिन नतीजा ठन-ठन गोपाल.
भला हो आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ का जो उनके आवेदन के जवाब में ये जानकारी बेपर्दा हुई कि 12 अगस्त 2026 तक देशभर में कुल 59,03,74,907 जन धन खाते थे। इन सभी खातों में कुल जमा राशि ₹3.15 लाख करोड़ से ज्यादा थी। कुल खातों में 32.89 करोड़ खाते महिलाओं के नाम पर हैं, जिसमें ट्रांसजेंडर खाताधारक भी शामिल हैं, जबकि 26.14 करोड़ खाते पुरुषों के हैं।
सरकार ने माना कि 5,72,35,490 जन धन खातों में शून्य बैलेंस था। वहीं 15,36,77,009 खाते इनऑपरेटिव यानी निष्क्रिय श्रेणी में रखे गए थे। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में ऐसे बैंक खाते मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल लंबे समय से नहीं किया जा रहा है।
आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत अगस्त 2014 में वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन के रूप में की गई थी।खूब ढोल पीटे गए थे. खाता खुलवाने के लिए हर बैंक में कतारें लगी थीं.योजना का मकसद बुरा नहीं था. सरकार का मकसद देश के हर परिवार तक बैंकिंग सुविधाओं की पहुंच बनाना, कम से कम एक बेसिक बैंक खाता उपलब्ध कराना, वित्तीय साक्षरता बढ़ाना और लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना था। जन धन खातों के जरिए करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद मिली। हालांकि, बड़ी संख्या में निष्क्रिय और जीरो बैलेंस खाते यह सवाल भी उठाते हैं कि इन खातों का इस्तेमाल कितनी नियमितता से हो रहा है
जन धन खातों की दुर्दशा के मामले में डबल इंजन से चल रहे उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 95.92 लाख जन धन खाते जीरो बैलेंस वाले थे। इसके बाद बिहार में 62.35 लाख, पश्चिम बंगाल में 37.20 लाख, असम में 36.30 लाख और महाराष्ट्र में 36.04 लाख ऐसे खाते थे। वहीं, निष्क्रिय खातों के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा। यहां 3.23 करोड़ जन धन खाते इनऑपरेटिव थे। इसके बाद बिहार में 1.59 करोड़, मध्य प्रदेश में 1.35 करोड़, पश्चिम बंगाल में 1.02 करोड़ और महाराष्ट्र में 97.94 लाख खाते निष्क्रिय थे।
कुल जन धन खातों की संख्या में भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। राज्य में 10.51 करोड़ खाते हैं। बिहार में 7.01 करोड़, पश्चिम बंगाल में 5.73 करोड़, राजस्थान में 3.87 करोड़ और महाराष्ट्र में 3.85 करोड़ जन धन खाते हैं।
मैं ये लेख इसलिए लिख रहा हूँ ताकि आप समझ सकें कि जन धन खाते खोलने और जीडीपी में उछाल के बीच कोई रिश्ता नहीं है. जीडीपी के उछलने से आम आदमी की जेब भरती तो जनधन बैंक खातों की ये दशा न होती. खातों में पैसा आता जाता रहता. खाते सक्रिय दिखाई देते. लेकिन ये मुद्दा बहस से कोसों दूर है क्योंकि बहस के केंद्र में तो स्वतंत्र भारद्वाज है. दिमागी नक्सल को ठीक करने के लिए दी गई होम्योपैथिक गोली है.
@ राकेश अचल



















