ग्वालियर केंद्रीय जेल ग्वालियर में गुरुवार को उस समय अधिकारियों में हलचल मच गई, जब प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष ललित किशोर ने जेल का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य जेल में बंदियों को मिल रही सुविधाओं और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन की जमीनी स्थिति परखना था प्रधान जिला न्यायाधीश ने जेल की बैरकों से लेकर पाकशाला और जेल अस्पताल तक का निरीक्षण किया। इस दौरान बंदियों के रहने की व्यवस्था, साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति देखी गई। उन्होंने जेल प्रशासन को व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।निरीक्षण का एक महत्वपूर्ण पहलू बंदियों को मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता भी रहा। ऐसे बंदी जिन्हें जमानत, अपील, रिवीजन अथवा अन्य कानूनी प्रक्रिया में सहायता की आवश्यकता है, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से समय पर विधिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।अचानक हुए इस निरीक्षण ने जेल की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीरता का संदेश दिया। न्यायिक अधिकारियों का यह निरीक्षण केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने पर जोर रहा कि जेल में निरुद्ध बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार पांडे, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पुष्पेंद्र सिंह, प्रभारी कलेक्टर सोजान सिंह रावत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, केंद्रीय जेल अधीक्षक राकेश कुमार सहित जेल के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



















