मोहन सरकार ने चेकपोस्ट बंद किए फिर शीतला रोड पर यह ‘कैश कलेक्शन पॉइंट’ क्यों?
ग्वालियर शीतला रोड जहां कागजों में परिवहन जांच होती है, लेकिन सड़क पर ट्रक चालकों के बीच एक अलग ही चर्चा है। आरोप है कि यहां वाहन रोकने का मकसद नियमों की जांच से ज़्यादा कथित नकद वसूली बन चुका है। कई चालकों का दावा है कि पहले गाड़ी रोको, फिर कागजों में कमी निकालो और उसके बाद शुरू होता है “सेटिंग” का खेल। सवाल यह है कि अगर सब कुछ कानून के मुताबिक हो रहा है तो चालान मशीन से कटने के बजाय नकद पैसों की चर्चा क्यों होती है?
RTO कार्यालय है या दलालों का कंट्रोल रूम? आखिर किसके इशारे पर चल रहा है पूरा खेल?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सड़क पर कुछ कथित दलाल खुलेआम सक्रिय दिखाई देते हैं। चालक कहते हैं कि अधिकारी तक पहुंचने से पहले ही “काम कराने वाले” लोग सामने आ जाते हैं। अगर यह सच है तो बड़ा सवाल खड़ा होता है क्या सरकारी कार्रवाई अब बिचौलियों के भरोसे चलेगी? क्या वरिष्ठ अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं देता, या फिर सब कुछ उनकी नाक के नीचे हो रहा है?
मोहन सरकार ने चेकपोस्ट बंद किए फिर शीतला रोड पर यह ‘कैश कलेक्शन पॉइंट’ क्यों?
सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए परिवहन चेकपोस्ट बंद किए थे। बॉडी कैमरा, POS मशीन और डिजिटल चालान जैसी व्यवस्था लागू की गई। लेकिन अगर आज भी ड्राइवर कथित नकद वसूली की शिकायत कर रहे हैं, तो सवाल सीधे व्यवस्था पर उठता है। आखिर कैमरे क्या रिकॉर्ड कर रहे हैं? POS मशीनें कहां हैं? और सरकारी खाते में कितना पैसा जमा हो रहा है?
अगले अंकों में बड़ा खुलासा! शीतला रोड पर ट्रक चालकों से कथित वसूली का खेल—स्टिंग में क्या बोले ड्राइवर, किसके संरक्षण में चल रहा ‘कैश कलेक्शन’?
अचलेश्वर एक्सप्रेस के अगले अंकों में देखिए शीतला रोड पर परिवहन जांच को लेकर सामने आए गंभीर आरोपों की पड़ताल। ड्राइवरों ने कैमरे के सामने क्या बताया? चेकिंग के नाम पर कथित तौर पर कितनी रकम मांगे जाने के आरोप हैं? मौके पर कौन-कौन सक्रिय है और इस कथित वसूली व्यवस्था के पीछे किसका संरक्षण होने के सवाल उठ रहे हैं? स्टिंग और ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए दावों की पूरी कहानी—अगले अंक में।



















