ग्वालियर, 31 जुलाई। ग्वालियर में ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। झांसी रोड थाना क्षेत्र में एक किशोर के व्यवहार में आए गंभीर बदलाव के बाद पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया और आगे की काउंसलिंग एवं पुनर्वास के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। यह मामला इस बात का संकेत है कि अत्यधिक मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग बच्चों के मानसिक एवं सामाजिक व्यवहार पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
जानकारी के अनुसार, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि एक किशोर लंबे समय से स्कूल नहीं जा रहा है और अपनी दादी के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। सूचना मिलते ही झांसी रोड थाना प्रभारी निरीक्षक शक्ति सिंह यादव के निर्देशन में उपनिरीक्षक आशीष शर्मा और आरक्षक धर्मेंद्र धाकड़ को तत्काल मौके पर भेजा गया।
पुलिस जब किशोर के घर पहुंची तो उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया। परिजनों की मदद से दरवाजा खुलवाकर पुलिस ने उसे सुरक्षित बाहर निकाला। जांच के दौरान उसके पास से दो एंड्रॉयड मोबाइल फोन मिले। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि किशोर लंबे समय से ऑनलाइन गेम खेलने का आदी हो चुका था, जिसके कारण उसके स्वभाव में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और आक्रामकता लगातार बढ़ती जा रही थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि किशोर की पारिवारिक परिस्थितियां भी बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। माता-पिता के बीच विवाद, माता का तलाक और पिता के निधन के बाद वह अपनी दादी के साथ रह रहा है। इन परिस्थितियों का असर भी उसके मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर पड़ा है। पुलिस ने मौके पर किशोर और उसकी दादी की प्राथमिक काउंसलिंग की तथा बेहतर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दोनों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी दंडात्मक कार्रवाई के बजाय किशोर के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना है, ताकि उसे उचित मार्गदर्शन, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास मिल सके। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी गई है और आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया जारी है।
ग्वालियर पुलिस की अपील
ग्वालियर पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की दिनचर्या, मित्र मंडली और मोबाइल व इंटरनेट के उपयोग पर सकारात्मक निगरानी रखें। यदि बच्चे के व्यवहार में अचानक चिड़चिड़ापन, आक्रामकता, सामाजिक दूरी या पढ़ाई से दूरी जैसे बदलाव दिखाई दें तो समय रहते काउंसलिंग कराएं और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस, बाल कल्याण समिति या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद लें।
साथ ही बच्चों से भी अपील की गई है कि वे अपने माता-पिता और अभिभावकों का सम्मान करें, अपनी समस्याओं को खुलकर साझा करें तथा मोबाइल और ऑनलाइन गेम का सीमित एवं संतुलित उपयोग करें।

















