ग्वालियर में प्रशासन एक ओर ‘नशा मुक्ति अभियान’ चलाकर युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के कई इलाकों में देर रात तक खुलेआम शराब और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री होने के आरोप लग रहे हैं। सवाल यह है कि जब अभियान चल रहा है, तो आखिर रात के अंधेरे में नशे का यह कारोबार किसकी सरपरस्ती में जारी है? क्या जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है, या फिर अभियान और हकीकत के बीच बड़ा अंतर है लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग दिखाई देती है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद हालात में कोई खास बदलाव नहीं आया। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ी नशे की गिरफ्त में और तेजी से फंस सकती है।
बड़ा सवाल !
- क्या नशा मुक्ति अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- आखिर रातभर खुलेआम चल रहे इस कारोबार पर लगाम कब लगेगी?
- युवाओं का भविष्य बचाने के लिए जिम्मेदार विभाग कब तक प्रभावी कार्रवाई करेगा?
इन सवालों के जवाब अब जनता जानना चाहती है।
आउट्रो
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