बरसात में खनन बंद होने के सरकारी दावों के बावजूद नदियों से रेत के अवैध उत्खनन और बिना रॉयल्टी-बिना नंबर प्लेट वाहनों के संचालन के आरोप; खनिज विभाग, पुलिस और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल।
ग्वालियर जिले में अवैध रेत खनन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिले में बरसात के दौरान खनन बंद होने के सरकारी दावों के बावजूद कई नदी घाटों से खुलेआम रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है। इस पूरे मामले में सबसे अधिक सवाल जिला खनिज अधिकारी घनश्याम यादव की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की नाक के नीचे बिना रॉयल्टी और बिना वैध दस्तावेजों के सैकड़ों वाहन रेत का परिवहन कर रहे हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं दे रही।आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि कई वाहन बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
ऐसे वाहनों पर न तो परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई दिखाई देती है, न पुलिस की और न ही खनिज विभाग की। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन वाहनों को संरक्षण किसका प्राप्त है और संबंधित विभाग चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागीय रिकॉर्ड में कार्रवाई दिखाकर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग बताई जा रही है। यदि बरसात के दौरान खनन प्रतिबंधित है तो फिर नदी घाटों से निकल रही रेत और सड़कों पर दौड़ रहे भारी वाहन किसकी अनुमति से संचालित हो रहे हैं?
यह ऐसा सवाल है जिसका जवाब प्रशासन और खनिज विभाग दोनों को देना चाहिए।खनिज अधिकारी घनश्याम यादव के कार्यकाल में अवैध खनन को लेकर लगातार उठ रहे सवालों ने शासन को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान पर भी चिंता बढ़ा दी है। यदि आरोप सही हैं तो यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने का भी हो सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध उत्खनन और परिवहन में शामिल लोगों पर कार्रवाई हो तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच कराई जाए।

















