follow us on:

कड़क कुर्ते में तिलक खींचकर चलने वाले नरोत्तम मिश्रा के चेहरे से मुस्कान उड़ गई, टिकट कटते ही

मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक तेज-तर्रार अंदाज़, कड़क कुर्ता, माथे पर तिलक और आत्मविश्वास से भरी चाल के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. नरोत्तम मिश्रा इन दिनों बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते दिखाई दे रहे हैं। दतिया उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने उनका टिकट काटकर नया चेहरा उतार दिया और इसके बाद सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा।सार्वजनिक मंचों पर डॉ. मिश्रा अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। वह संयमित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और पार्टी के फैसले को स्वीकार करने का संदेश भी दे रहे हैं। लेकिन राजनीति केवल शब्दों से नहीं चलती, चेहरे के भाव भी बहुत कुछ कह जाते हैं।

हाल के दिनों में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी में जो मायूसी दिखाई दी, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।डॉ. नरोत्तम मिश्रा कभी भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। संगठन और सरकार दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। विरोधियों पर उनके तीखे हमले, मीडिया के सामने बेबाक बयान और सत्ता के केंद्र में उनकी सक्रिय भूमिका उनकी पहचान बन चुकी थी। ऐसे नेता का अचानक चुनावी मैदान से बाहर होना केवल एक टिकट कटने की घटना नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।भाजपा इसे संगठन का सामान्य निर्णय बता रही है, लेकिन दतिया और प्रदेश की राजनीति में यह फैसला असामान्य चर्चाओं का विषय बन गया है। समर्थकों के बीच निराशा है, जबकि विरोधी इसे भाजपा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन के रूप में देख रहे हैं। यही कारण है कि हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर ऐसा क्या बदला कि वर्षों तक पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे नेता को चुनावी मैदान से बाहर कर दिया गया।

राजनीति में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक हैं। आज जो शीर्ष पर होता है, वह कल चुनौती का सामना भी कर सकता है। लेकिन इतना तय है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है। आने वाले समय में वह किस भूमिका में दिखाई देंगे, यह पार्टी नेतृत्व और परिस्थितियां तय करेंगी फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि कड़क कुर्ते, माथे के तिलक और आत्मविश्वास भरी मुस्कान से पहचाने जाने वाले नेता के चेहरे पर आई खामोशी प्रदेश की राजनीति में कई अनकहे सवाल छोड़ गई है। टिकट कटने के बाद वह कार्यकर्ताओं को भले ही भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन राजनीति के जानकार मानते हैं कि उनके चेहरे की मायूसी बहुत कुछ बयां कर रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि यह राजनीतिक विराम है या किसी नई शुरुआत की भूमिका।

Latest PDFs

Achleshwar Express 05 Oct

05/10/2026

Achleshwar Express 28 sep

28/09/2026

Achleshwar Express 21 sep

21/09/2026

Achleshwar Express 14 sep

14/09/2026

Achleshwar Express 07 sep

07/09/2026

Achleshwar Express 31 Aug

31/08/2026