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ग्वालियर की जनता पूछ रही है विकास के दावों के बीच आखिर कब खत्म होंगी रोजमर्रा की परेशानियां?

ग्वालियर। एक ओर सरकार विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर ग्वालियर की आम जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करती दिखाई दे रही है। शहर के कई इलाकों में टूटी सड़कें, उफनते सीवर, अनियमित पेयजल आपूर्ति, जाम से जूझती सड़कें, कचरे के ढेर और सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्थाएं लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं। नागरिकों का कहना है कि योजनाओं और घोषणाओं का लाभ उन्हें जमीन पर अपेक्षित स्तर पर नहीं मिल पा रहा है।

बरसात के मौसम में शहर के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या हर साल दोहराई जाती है। कई सड़कों की हालत ऐसी है कि वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए आवागमन जोखिम भरा हो जाता है। जगह-जगह गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी लोगों की प्रतीक्षा में है।

शहर की सीवर व्यवस्था भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। कई मोहल्लों में सीवर ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी ओर कई क्षेत्रों में नियमित और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को लेकर भी नागरिक लगातार शिकायतें करते रहे हैं।

यातायात व्यवस्था भी लोगों की बड़ी परेशानी है। प्रमुख चौराहों और बाजारों में घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है। अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई नहीं देता सरकारी अस्पतालों में भी मरीजों और उनके परिजनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इलाज, दवाओं, जांच और व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। वहीं शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर भी नागरिकों की नाराजगी बनी रहती है। कई स्थानों पर नियमित कचरा उठाव नहीं होने से गंदगी और दुर्गंध की समस्या पैदा होती है।जनता का कहना है कि विकास केवल घोषणाओं, शिलान्यासों और विज्ञापनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका असर आम नागरिक के जीवन में साफ दिखाई देना चाहिए।

लोग चाहते हैं कि प्रशासन और सरकार प्राथमिकता के आधार पर बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करे और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए अचलेश्वर एक्सप्रेस का मानना है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार की योजनाओं की सफलता का वास्तविक पैमाना जनता की संतुष्टि और जमीन पर दिखाई देने वाला बदलाव है। यदि नागरिक लगातार मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग तथ्यों के आधार पर समस्याओं की समीक्षा करें और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करें। जनता के हित से जुड़े मुद्दों पर निष्पक्ष और तथ्यपरक सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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