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दोहरी शासन व्यवस्था का रोना बंद करे NC, सुनील शर्मा की दो टूक- ‘J&K को पहले राज्य का दर्जा नहीं, स्थायी शांति चाहिए’

ब्यूरो, श्रीनगर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने बुधवार को नेशनल कान्फ्रेंस की सरकार पर प्रदेश में कथित दोहरी शासन व्यवस्था की आड़ में अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोढ़ने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि जब यहां प्रदेश सरकार के पास कानून व्यवस्था का जिम्मा था,तब यहां सड़कों पर आम लोगों का खून बहता था। इसके साथ ही उन्होंने कश्मीरी हिंदुओं की कश्मीर में सम्मानजनक वापसी के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि अब कश्मीरी हिंदू फिर से घाटी में स्वेच्छा से लौटने को उत्सुक है केंद्र सरकार का उद्देश्य ऐसा सुरक्षित और स्थायी माहौल तैयार करना है, जिससे कश्मीरी हिंदुओं का पुनर्वास संभव हो सके।

आज यहां पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने नेशनल कान्फ्रेंस की राज्य के दर्जे की बहाली की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा लौटाने के लिए संकल्पबद्ध है,लेकिन उससे पहले यहां स्थायी शांति जरुरी है। उन्होंने कहा कि यहां हालात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

जब सत्ता थी तो PSA से युवाओं को भरते थे

प्रदेश सरकार यहां अपनी जिम्मेदारियों से बचते हुए दोहरी शासन व्यवस्था का बहाना लगाती है, वह पुलिस और कानून व्यवस्था पर नियंत्रण की बात करती है,लेकिन जब प्रदेश जब राज्य सरकार के पास कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी थी, तब प्रदेश हिंसा और आतंकवाद की घटनाओं से प्रभावित रहता था। सड़कों पर खून बहता था, युवाओं और स्कूली बच्चों तक को हिंसा का सामना करना पड़ता था तथा पीएसए जैसे विभिन्न सुरक्षा कानूनों के तहत बड़ी संख्या में लोगों पर कार्रवाई की जाती थी।

उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद कानून-व्यवस्था का नियंत्रण केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस तंत्र के पास आने से हालात में बदलाव आया है। अब प्रदेश की सड़कों पर शांति का माहौल है और युवा भयमुक्त होकर अपने भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।

विकास के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बिजली, पानी, सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र सरकार खुलकर वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। सरकार का दावा है कि विकास परियोजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं रखी गई है।

कश्मीरी हिंदू अपनी संपत्तियों पर दावा कर रहे

विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की कश्मीर में सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास संंबंधी सवाल के जवाब में सुनील शर्मा ने कहा कि कश्मीर हिंदू इस भूमि और इसकी पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके बिना जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान अधूरी है। सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जिसमें कश्मीरी हिंदू अपनी संपत्तियों पर दावा कर रहे हैं, उन्हें पुनर्निर्मित कर रहे हैं और अपनी जमीनों को वापस हासिल करने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं।

अतीत में कश्मीरी हिंदुओं और अन्य नागरिकों को आतंकवाद का निशाना बनाया जाता था, लेकिन वर्तमान में स्थिति बदल रही है। केंद्र सरकार का उद्देश्य ऐसा सुरक्षित और स्थायी माहौल तैयार करना है, जिससे कश्मीरी हिंदुओं का पुनर्वास संभव हो सके। पुनर्वास की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आने वाले समय में अधिक से अधिक कश्मीरी हिंदुओं के पुन: कश्मीर में वापस बसने की संभावना

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