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क्या 261 पुलिस अधिकारियों का हक दबा दिया गया? पदोन्नति प्रक्रिया पर उठे बड़े सवाल, पुलिस महकमे में बढ़ा असंतोष

एक ही दिन जारी हुई दो पदोन्नति सूचियां, फिर भी 261 रिक्त पद नहीं भरे गए; पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर पर गंभीर प्रश्न।

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में हाल ही में जारी पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस महकमे के भीतर यह चर्चा तेज है कि इंस्पेक्टर से डीएसपी पद पर पदोन्नति होने के बाद रिक्त हुए 261 पदों को सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पदोन्नति सूची में शामिल नहीं किया गया।

इससे सैकड़ों पात्र और बेदाग अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।जानकारों का कहना है कि जिस दिन इंस्पेक्टर से डीएसपी पदोन्नति सूची जारी हुई, उसी दिन सब-इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पदोन्नति सूची भी जारी की गई। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जब विभाग को रिक्त पदों की जानकारी थी, तो उन पदों को पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल क्यों नहीं किया गया?पुलिस अधिकारियों के बीच यह मांग भी उठ रही है कि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक से संबंधित आदेश, पात्रता सूची तथा फिट लिस्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पर उठ रहे संदेह समाप्त हो सकें।

पारदर्शिता किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया की सबसे बड़ी ताकत होती है और पुलिस जैसे अनुशासित विभाग में इसकी अपेक्षा और भी अधिक रहती है।सूत्रों के अनुसार वर्ष 2021 से चल रही कार्यवाहक व्यवस्था के दौरान कई ऐसे पद भी रिक्त हुए हैं, जिन पर नियमित पदोन्नति नहीं हो सकी। विभागीय जांच अथवा अन्य कारणों से अपात्र हो चुके अधिकारियों के स्थान पर योग्य एवं पात्र अधिकारियों को अवसर देने की मांग लंबे समय से उठ रही है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाने से असंतोष बढ़ता जा रहा है।

पुलिस विभाग के हजारों अधिकारी और कर्मचारी यह उम्मीद कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर वस्तुस्थिति स्पष्ट करेंगे। यदि वास्तव में 261 पद रिक्त हैं, तो उन्हें तत्काल पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल कर पात्र अधिकारियों को न्याय दिलाया जाना चाहिए पुलिस बल का मनोबल केवल कानून व्यवस्था से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और समयबद्ध पदोन्नति व्यवस्था से भी मजबूत होता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, न्यायसंगत और विवादों से मुक्त दिखाई दे। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस मुख्यालय और राज्य सरकार इन उठते सवालों पर क्या निर्णय लेती है।

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