डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के खेतों से लेकर उनके खातों तक हर स्तर पर उनका ध्यान रख रही है। उन्होंने बताया कि नई ‘कवच योजना’ के जरिए उन किसानों को राहत मिलेगी, जो सहकारी खातों में पुरानी गड़बड़ियों या लंबित जांच के कारण नए कृषि ऋण और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे।
नर्मदापुरम में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को भोपाल से वर्चुअल संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव किसानों से संवाद का उत्सव है। अब तक 20 जिलों में इसके 10 आयोजन हो चुके हैं और नर्मदापुरम में यह 11वां आयोजन है।
सरसों और धान को भी मिलेगा भावांतर योजना का लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने रिकॉर्ड 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद कर किसानों को एमएसपी और बोनस का लाभ दिया। सोयाबीन के बाद अब सरसों और धान को भी भावांतर योजना में शामिल किया गया है। साथ ही कोदो-कुटकी की पहली बार एमएसपी पर खरीदी कर बोनस दिया गया है तथा मूंग उपार्जन की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है।
फसल विविधीकरण और पशुपालन पर जोर
मुख्यमंत्री ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि पशुपालन, मत्स्य पालन और दुग्ध उत्पादन आय बढ़ाने के प्रभावी माध्यम हैं। राज्य सरकार दुग्ध उत्पादन में 20 प्रतिशत वृद्धि के लक्ष्य के साथ दुग्ध समितियों का गठन कर रही है।
बागवानी, नर्सरी और फूड प्रोसेसिंग को मिलेगा प्रोत्साहन
उन्होंने कहा कि नर्मदापुरम में आम, अमरूद, संतरा, अनार, नींबू और केला जैसी उद्यानिकी फसलों की अपार संभावनाएं हैं। सरकार फलों के बाग, नर्सरी, पॉलीहाउस और शेडनेट हाउस स्थापित करने पर अनुदान दे रही है। वहीं फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।
नर्मदापुरम की विशेष पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदापुरम रेशम नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। यहां का उच्च गुणवत्ता वाला रेशम, शरबती गेहूं और बासमती चावल प्रदेश की पहचान हैं। उन्होंने बताया कि बाबई-मोहासा औद्योगिक क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है तथा कटनी के पास लॉजिस्टिक्स पार्क भी विकसित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार ने पूरे वर्ष को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया है और किसानों के हित में योजनाओं का लाभ लगातार पहुंचाया जाएगा।

















